इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में बन्दी से राजस्थान में पानी की किल्लत

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना जो कि राजस्थान की जीवन रेखा मानी जाती है। तथा इसे राजस्थान में राजस्थान केनाल के नाम से भी जाना जाता है। पिछले कुछ समय से हरिके बैराज जो इस नहर परियोजना का उद्गम स्थल है, से पानी की मात्रा घटाने से मरुधरा पर इसका काफी बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में 1 फरवरी 2021 को हरीके बैराज से पानी की मात्रा को काफी हद तक पंजाब गवर्नमेंट द्वारा कम कर दिया गया परंतु राजस्थान सरकार की निरंतर मांग प्रयासों के अनुरूप फरवरी माह के दूसरे सप्ताह में पानी की मात्रा बढ़कर 6000 क्यूसिक लीटर तक पहुंच गई है।

परंतु इंदिरा गांधी नहर परियोजना द्वारा इसकी विभिन्न जल वितरिकाओ में पानी की आपूर्ति हेतु करीब 9150 क्यूसेक लीटर पानी की आवश्यकता महत्वपूर्ण है। परंतु अभी तक इस स्तर तक पानी की उपलब्धता ना होने के कारण राजस्थान सरकार के बीकानेर संभाग के चीफ इंजीनियर श्री विनोद चौधरी ने विभिन्न सिंचित क्षेत्र के आयुक्तों को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं की नहरों में पानी चलाई जाने हेतु जारी सक्रिय व्यवस्था में बताए गए समूह (क) के अनुसार आने वाली नहरों जिनमें 9 फरवरी 2021 को 6:00 बजे से लेकर 18 फरवरी 2021 प्रातः 6:00 बजे तक जल संचालन होने वाली नहरों में पानी की आपूर्ति को अगले निर्देश तक 48 घंटे के लिए स्थगित कर दिया गया है।

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना की पृष्ठभूमि एवं निर्माण

15 अगस्त 1947 को भारत आजाद होने के पश्चात दामोदर नदी घाटी परियोजना का शुभारंभ भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा किया गया एवं उन्होंने इस नदी घाटी परियोजना को आजाद भारत का मंदिर होने की संज्ञा दी। इसी श्रेणी में तत्कालीन परिस्थितियों के अनुसार भारत को खाद्यान्न आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न सिंचाई परियोजना को लागू करने की योजनाएं बनाई जाने लगी।

भारत के सबसे विस्तृत राज्य राजस्थान मरुस्थलीय प्रदेशों होने के कारण अनाज उत्पन्न करने मैं सक्षम स्थिति में नहीं था, राजस्थान की मरुधरा को हरा-भरा करने तथा पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में नहरी पानी पहुंचाने हेतु राजस्थान नहर प्रयोजना जिसे बाद में नाम बदलकर इंदिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया, का उद्घाटन 1958 ईस्वी में हुआ।

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना सतलज व व्यास नदी के संगम जोकि हरीके पतन के नाम से जाना जाता है , से संचालित है। यह परियोजना पंजाब, हरियाणा होते हुए राजस्थान में प्रवेश करती है। राजस्थान प्रदेश में इंदिरा गांधी नहर परियोजना से 10 जिलों मैं (हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर इत्यादि ) सिंचाई की व्यवस्था इस नहर से निकाली गई वितरिकाओ से की जाती है।

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना से राजस्थान के कई जिलों में 7 अलग-अलग लिफ्ट सिंचाई योजना के माध्यम से भी सिंचाई तथा पीने का पानी पहुंचाया जाता है।

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1 thought on “इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में बन्दी से राजस्थान में पानी की किल्लत”

  1. मै भी राजस्थान से हूँ भाई, नहरों में पानी की कमी वास्तव में बड़ी समस्या है, लेकिन इंद्रा गांधी में अब जो पानी कम हुआ है, उस का कारण ओर है!
    पंजाब में अब सरहिन्द फीडर का Relining Work चल रहा, यह नहर इन्दिरा गान्धी के साथ – साथ – साथ आती है, इस कार्य के चलते इन्दिरा गांधी
    दो बार टूट गई, इसके चलते ठेकेदारों ने विभाग से पानी कम करने की मांग की!

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