पिछले कुछ दिनों से सरकार ने गेहूं और धान के निर्यात पर रोक लगा दी गई है इसेक चलते ऐसा लग रहा है की गेहूं और धान में अब ज्यादा तेजी की उम्मीद नही है। गेहूं और धान के भाव में अभी कुछ दिनों से पूरी तरह से रोक लगी है मंडी में भी इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है।
पिछले लेख में हमने गेहूं के निर्यात एवं स्टॉक पर जानकारी दी थी, इसके चलते ही अब सरकार ने धान के निर्यात (rice export ban) पर भी रोक लगा दी गई है।

पिछले दो साल में गेहूं और चावल का निर्यात
पिछले 2 साल से भारत देश में गेहूं और चावल निर्यात (rice export) बहुत ही कम था हम ऐसा मान सकता है की गेहूं और चावल का निर्यात न के ही बराबर था।
चावल में केवल बासमती चावल का कुछ प्रतिशत ही निर्यात हुआ है गेहूं का निर्यात (wheat export) तो इससे भी कम है शायद यही कारण है की पिछले दो सालो में खाघ प्रथार्थ के भाव बड़े है।
इसी के चलते ही भारत देश में सरकार ने चीनी और कपास का निर्यात (cotton export) भी कम किया है इसका निर्यात भी कुछ खास नही है। क्योंकि अन्य बड़े औतपादक देशों की तुलना में हमारी किमते ज्यादा होती है।
इसी लिए भारत सरकार ने 2019 और 2020 में कई घोषणा भी थी यही कारण है की भारत देश को विश्व व्यापार संगठन में अन्य बड़े उत्पादक देशों का विरोध भी सहना पड़ा।
अभी सरकार घरेलू मंडियों में गेहूं की आपूर्ति बनाए रखन की पूरी तैयारी कर ली है, क्योंकि सरकार को अब गेहूं में ज्यादा तेजी दिखाई नही दे रही है।
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पिछले साल के आयात का रिकॉर्ड
एक साल से लगातार आयत में ज्यादा ढील होने के कारण दलहनी फसल की कीमत पिछले कुछ महीनो से 6600 रुपए प्रति कुंटल के एमएचपी से नीचे या फिर उसके आस पास चल रही है।
इसके चलते ही कपास और सोयाबीन फसल की किमते MSP से ऊपर चल रही है। यही कारण है की भारतीय किसानों का झुकाव एक बार फिर से कपास और सोयाबीन पर है।

किन किन चीजों पर सरकार ने निर्यात पर रोक
सबसे पहले सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगी थी, इसके चलते बाद में सरकार ने गेहूं से निर्मित चीजों पर भी रोक लगा दी है जैसे- मैदा, रवा, आटा और अन्य गेहूं से निर्मित चीजों पर लगी है।
हाली में भारत सरकार ने फिर एक बार गेहूं और चावल के निर्यात पर रोक लगा दी गई है, इसका मुख्य कारण है की गेहूं और चावल का भाव दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा था इसके कारण भारत के आम नागरिक इसे खरीदने में असफल रहते थे।
पहले वर्ष 2020 में गेहूं और चावल में वैश्विक आपूर्ति में भारत का ज्यादा दखल नही था, भारत से चावल और गेहूं का निर्यात बहुत कम था या सही कहें तो नहीं के बराबर था।
उत्पादन में भारी गिरावट
पिछले एक, दो सालो से लगातार वैश्विक स्तर पर खाघ के दाम में बढ़ने के कई अन्य कारण भी है, इसका कारण जलवायु भी है। जल वायु की वजह से देशों में बड़े उत्पादन में भारी गिरावट हो रही है। पेट्रोलियम उत्पादो की कीमत में उछाल दिखाई दे रहा है।
भारत में खरीफ की बुआई
वर्तमान में भारत में यह समय वर्षा है और इस समय भारत देश में खरीफ फसल की बोई की जाती है, इस समय धान, मक्का, गन्ना, कपास, सोयाबीन,मूंगफली, तुअर, मूंग और उड़द आदि खरीफ फसल की बुआई की जाती है।
कम बारिश से हुआ भारत में नुकसान
पूर्व कृषि सचिव जे अनुसार इस वर्ष बारिश कम होने की वजह से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल में (lower production of paddy) धान के उत्पादन में बड़ी कमी आ सकती है ऐसा संभावना है।
परंतु फिर भी चावल का जितना स्टॉक होना चाहिए, उससे भी तीन गुना ज्यादा स्टॉक वर्तमान है (low stock of wheat) गेहूं का स्टॉक वाकई कम है।